Using science to overcome superstition. A story of Shobha from Bap Block.

विज्ञान के प्रयोग से मिटा रही अंधविश्वास
 
फलोदी से 30 किलोमीटर दूर मालियों का बास, बाप में शोभा का घर है। इसके पिता का नाम श्री हीरालाल माली व माता का नाम श्रीमती रेखा है। शोभा के 6 बहिने हैं। शोभा दसवीं में पढ रही है। शोभा स्वभाव से सहज व कम बोलने वाली लड़की है। जाति से माली है जो कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आती है।

जुड़ाव: शोभा का दूसरा दशक से जुड़ाव 2011 में विज्ञान मेले के दौरान हुआ। शोभा ने पहली बार विज्ञान से संबंधित दुकानें देखी वह आश्चर्य चकित रह गई कि विज्ञान को समझने की भी कोई दुकानें होती हैं। इस मेले से शोभा ने बहुत कुछ सीखा व समझा। दूसरे विज्ञान मेले से पूर्व शोभा ने विज्ञान कार्यशाला में भाग लेकर मॉडल बनाना व अंधविश्वास दूर करने के मुद्दों को समझा। शोभा ने मेले में स्टॉल संभालने की भी जिम्मेवारी लेकर एक कार्यकर्ता के रूप कार्य किया। विज्ञान मेले में बड़ी उम्र के अनुभवी लोगों, समुदाय के लोगों व स्कूल के बच्चों को विज्ञान के बारे में प्रयोग करके समझ बनाने प्रयास किया।

जीवन कौशल प्रशिक्षण: शोभा ने सात दिवसीय जीवन कौशल प्रशिक्षण में पहली बार घर से दूर फलोदी में आवासीय रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान शोभा शुरूआत में बहुत सहमी सी रहती थी लेकिन धीर-धीरे वह प्रशिक्षण में सभी किशोरियों के साथ घुल मिल गई। उसने इस दौरान फलोदी के कुछ मोहल्लों में जाकर नशे पर सर्वे का कार्य किया और सर्वें के आंकड़ों को एग्जाई कर प्रस्तुतिकरण भी किया। शोभा ने प्रशिक्षण के दौरान किषोरी आवासीय शिक्षण शिविर में नशे पर आधारित नाटक प्रस्तुतिकरण में भी भागीदारी निभाई। यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से नशे पर आधारित था।
 
ज्ञान विज्ञान केन्द्र से जुड़ाव: बाप में दूसरा दशक द्वारा संचालित किया जा रहा ज्ञान विज्ञान केन्द्र में आयोजित होने वाली गतिविधियों में शोभा समय-समय पर भाग लेती रही है। वर्तमान में नए प्रोजेक्ट में इस केन्द्र का नाम इखवेलो रखा गया है। यहां पर शोभा ने विज्ञान के प्रयोग करना, विज्ञान के सरल मॉडल बनाना, किताबें पढना, पत्र-पत्रिकाएं पढना, कागज की टोपी, फूल आदि विभिन्न कार्य करने सीखे। इखवेलो पर कम्प्यूटर सीखाने का कार्य भी शुरू किया गया है। जहां शोभा ने थोड़ा बहुत कम्प्यूटर भी सीखा है। शोभा ने जीवन कौशल प्रशिक्षण के बाद गांव में जाकर युवा मंच के साथ मिलकर नशे पर सर्वे का कार्य भी किया तथा लोगों को नशे के प्रति सचेत रहने, नषा छुड़ाने व नषा कम करने का प्रयास भी इसके द्वारा जारी है। दूसरा दशक की गतिविधियों से जुड़ने के बाद शोभा ने जातिगत भेदभाव को कम करने में भी अपनी रूचि दिखाई है। खुद भी भेदभाव नहीं करती है। परिवार वालों को भी हमेशा समझाती रहती है कि हमें जातिगत भेदभाव नहीं करना चाहिए। शोभा ने अपनी मां को ग्राम पुस्तकालय चलाने के लिए तैयार किया। उसकी मां श्रीमती रेखा कक्षा पांचवीं पढी हुई है। शोभा ने अपनी मां का राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से 10वी का फॉर्म भी भरवाया है। नए प्रोजेक्ट के परिणाम को ध्यान में रखते हुए शोभा व उसकी सहेलियां ग्राम पुस्तकालय में अपना सहयोग दे रही है। ग्राम पुस्तकालय पर बाल मेले का आयोजन करने में इन सबकी भागीदारी रही। शोभा पहले ढाणी पुस्तकालय पर भी गतिविधियां करवाने में मदद करती थी। वह ग्राम पुस्तकालय पर विज्ञान के प्रयोग करके लोगों के मन से अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास भी करती रही है। शोभा की अभिव्यक्ति में भी निखार आया है इसमें शुरूआत में बहुत झिझक थी। शोभा पढाई का भी महत्व समझ रही है। वह अपने गांव व घर से दूर बाप स्कूल में पढने जाती है। साथ ही अन्य किशोरियों को भी स्कूल में पढने के लिए प्रोत्साहित करती रही है। शोभा को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद हैं इसने बाप में तीन दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता में भी भाग लिया। अपने गांव में भी किशोरियों के साथ कभी-कभी क्रिकेट खेलती है। शोभा की अभी इच्छा है कि वह नए-नए विज्ञान के प्रयोग सीखे और मॉडल बनाए। शोभा कम्प्यूटर सीखने में भी रूचि रखती है।

शोभा की गांव में पहचान एक मजबूत लड़की के रूप में है। शोभा को मोटरसाइकिल चलानी भी आती है। वह गाड़ी लेकर बाजार से सामान ला सकती है। शोभा ने अपनी मम्मी (माता) को गाड़ी पर खेत में छोड़ने व वापस घर लाने का काम किया। शोभा ने अपने गांव में सामाजिक मानचित्रण सर्वे के कार्यों में भी पूरा सहयोग किया है। दूसरा दशक के ब्लॉक स्तर के कार्यों जैसे विज्ञान मेला, युवा सम्मेलन, जीवन कौशल प्रशिक्षण आदि में भी एक काडर के रूप में कार्य किया। जिससे शोभा में मुद्दों की समझ बनी है और आगे बढने का अवसर भी मिला है।

ईच्छा - शोभा के मन की ईच्छा है कि वह फौज में भर्ती होकर समाज की सेवा कर सकें।